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नर्स का दावा : पेट दर्द से नहीं मरते मरीज, स्वास्थ्य विभाग की हो रही फजीहत

बिलासपुर। संभाग के सबसे बड़े सरकारी अस्पताल सिम्स (छत्तीसगढ़ आयुर्विज्ञान संस्थान) में स्टाफ का अमानवीय चेहरा सामने आया है। सोमवार की रात डेढ़ बजे सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र मस्तूरी से रेफर होकर पांच दिन के नवजात के साथ प्रसूता अपने स्वजन के साथ इलाज के लिए सिम्स पहुंची थी। उन्हें बिना इलाज के रात को ही लौटा दिया गया। 20 वर्षीय महिला को पेट दर्द था और ब्लड चढ़ाना था। साथ ही उनके पांच दिन के शिशु का एक हाथ नहीं उठ रहा था, जिसका एक्स-रे कराने के लिए महिला सिम्स पहुंची थी। इस बीच महिला को स्टाफ नर्स ने यह कहते हुए लौटा दिया कि रात में बड़े डॉक्टर नहीं हैं, इलाज नहीं होगा। वैसे भी पेट दर्द और पाइल्स से कोई नहीं मरता।

रात में महिला को भर्ती भी नहीं किया गया। इस खबर पर लगातार अपडेट जारी है। सही और सटीक ख़बरों के लिए बने रहिए jantaserishta.com पर। यह भी पढ़े महासमुंद जिले के अंतर्गत आने वाले ग्राम झलप के प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (PHC) की बदहाली और प्रशासनिक लापरवाही ने पूरे इलाके की ग्रामीण स्वास्थ्य व्यवस्था को वेंटिलेटर पर ला खड़ा किया है। पखवाड़े भर से इस सरकारी अस्पताल में स्वास्थ्य सेवा पूरी तरह से चरमरा गई हैं, जिससे क्षेत्र के हजारों निर्धन ग्रामीणों को इलाज के लिए दर-दर की ठोकरें खानी पड़ रही हैं। दरअसल, इस केंद्र पर नियमित रूप से पदस्थ एकमात्र योग्य महिला चिकित्सक डॉ. सुधा रैतिया उच्च पीजी (Post Graduation) अध्ययन के लिए लंबी छुट्टी पर चली गई हैं। उनके अवकाश पर जाने के बाद से स्वास्थ्य विभाग ने यहाँ किसी अन्य डॉक्टर की स्थायी तैनाती नहीं की, जिससे पूरा अस्पताल अब भगवान भरोसे चल रहा है। 


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